गुरुग्राम। साइबर और आर्थिक धोखाधड़ी के एक बड़े मामले में गुरुग्राम के वरिष्ठ नागरिक से करीब 1.98 करोड़ रुपये ठगे जाने के मामले में जांच के दौरान कई अहम जानकारियां सामने आईं। पुलिस ने बैंक खातों, ई-मेल, मोबाइल नंबरों और वॉट्सऐप रिकॉर्ड की पड़ताल के जरिए हैदराबाद निवासी अजहर अहमद उर्फ अकर्म तक पहुंच बनाई। वहीं, अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सुदीप गोयल की अदालत ने आरोपी की तीसरी जमानत याचिका स्वीकार कर ली।
शिकायत के अनुसार, प्रदीप कपूर से यांगजी शेरपा उर्फ याना और उसकी बहन नीमा ने कथित तौर पर मेडिकल इमरजेंसी और आर्थिक तंगी का हवाला देकर अलग-अलग समय पर रकम ट्रांसफर करवाई। शिकायतकर्ता को पैसे वापस लौटाने का भरोसा दिलाया गया और भावनात्मक रूप से प्रभावित कर भुगतान करने के लिए कहा गया।
आरोप है कि रकम लौटाने के संबंध में भरोसा कायम रखने के लिए फर्जी बैंक रसीदें और लेनदेन के स्क्रीनशॉट भी भेजे गए। इस तरह शिकायतकर्ता को करीब 1.98 करोड़ रुपये का नुकसान होने की बात सामने आई।
आर्थिक अपराध शाखा की पड़ताल में पता चला कि यांगजी शेरपा के बैंक खातों से अजहर अहमद के अलग-अलग खातों में कुल 87,94,721 रुपये ट्रांसफर किए गए थे। इस लेनदेन के आधार पर जांच एजेंसियों ने आरोपी से जुड़े अन्य डिजिटल और वित्तीय रिकॉर्ड की भी जांच की।
पुलिस ने ई-मेल सेवा प्रदाता गूगल से संबंधित रिकॉर्ड प्राप्त किए। जांच के दौरान ई-मेल से जुड़े दो मोबाइल नंबरों की जानकारी मिली, जिनमें से एक नंबर कथित तौर पर अजहर के नाम पर दर्ज पाया गया। इसके अलावा वॉट्सऐप रिकॉर्ड और इंटरनेट प्रोटोकॉल (आईपी) से संबंधित जानकारियों के विश्लेषण से भी आरोपी की भूमिका की कड़ियां जुड़ने का दावा किया गया।
पुलिस का आरोप है कि अजहर ने कथित तौर पर नीमा की पहचान अपनाकर अपनी असली पहचान छिपाई और फर्जी भुगतान रसीदों के माध्यम से शिकायतकर्ता को गुमराह करने में भूमिका निभाई। मामले में डिजिटल साक्ष्यों और वित्तीय लेनदेन की जांच के आधार पर कार्रवाई की गई।
इस बीच, अदालत ने आरोपी की तीसरी जमानत याचिका मंजूर कर ली है। जमानत मिलने का अर्थ आरोपों से दोषमुक्त होना नहीं है। मामले में आरोपों की सत्यता का निर्धारण कानूनी प्रक्रिया के तहत किया जाएगा।


