Headline
देहरादून में पहली बार ब्लूबेरी खेती की शुरुआत, 10 किसानों के साथ पायलट प्रोजेक्ट शुरू
देहरादून में पहली बार ब्लूबेरी खेती की शुरुआत, 10 किसानों के साथ पायलट प्रोजेक्ट शुरू
12 साल – मोदी युग में सड़क, रेल, हवाई सेवाओं का हुआ विस्तार
12 साल – मोदी युग में सड़क, रेल, हवाई सेवाओं का हुआ विस्तार
मुख्यमंत्री धामी ने ‘मेरी योजना’ पुस्तक के ऑडियो क्लिप का किया अनावरण
मुख्यमंत्री धामी ने ‘मेरी योजना’ पुस्तक के ऑडियो क्लिप का किया अनावरण
मुख्यमंत्री धामी ने चयनित 221 अभ्यर्थियों को बांटे नियुक्ति पत्र
मुख्यमंत्री धामी ने चयनित 221 अभ्यर्थियों को बांटे नियुक्ति पत्र
कैबिनेट मंत्री महाराज की छवि को नुकसान पहुंचाने वालों पर होगी कानूनी कार्यवाही
कैबिनेट मंत्री महाराज की छवि को नुकसान पहुंचाने वालों पर होगी कानूनी कार्यवाही
देहरादून के दून विहार में नई स्कॉर्पियो में लगी भीषण आग, टला बड़ा हादसा
देहरादून के दून विहार में नई स्कॉर्पियो में लगी भीषण आग, टला बड़ा हादसा
फीफा विश्व कप 2026 का काउंटडाउन शुरू, 11 जून से होगा आगाज
फीफा विश्व कप 2026 का काउंटडाउन शुरू, 11 जून से होगा आगाज
फायरिंग केस में खान सर को बड़ी राहत, पटना सिविल कोर्ट ने गिरफ्तारी पर लगाई रोक
फायरिंग केस में खान सर को बड़ी राहत, पटना सिविल कोर्ट ने गिरफ्तारी पर लगाई रोक
दहेज की मांग को लेकर विवाहिता के साथ जघन्य अपराध पर महिला आयोग सख्त
दहेज की मांग को लेकर विवाहिता के साथ जघन्य अपराध पर महिला आयोग सख्त

UCC विधेयक पर लगी राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की मुहर, नियमावली बनते ही उत्तराखंड में होगा लागू

UCC विधेयक पर लगी राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की मुहर, नियमावली बनते ही उत्तराखंड में होगा लागू

नई दिल्ली। पिछले महीने उत्तराखंड विधानसभा में पारित विधेयक को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की तरफ से मंजूरी दिए जाने के बाद उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code) कानून बन गया है। यह कानून उत्तराखंड में विवाह, तलाक, संपत्ति की विरासत के लिए एक सामान्य कानून प्रस्तुत करता है।

राष्ट्रपति की मंजूरी के साथ ही उत्तराखंड आजादी के बाद समान नागरिक संहिता लागू करने वाला पहला राज्य बन गया। यह कानून राज्य के अंदर या बाहर रहने वाले निवासियों के लिए लिव-इन रिलेशनशिप के रजिस्ट्रेशन को अनिवार्य बनाता है। लिव-इन रिलेशनशिप से पैदा हुए बच्चे वैध माने जाएंगे। इसके अलावा, अपने लिव-इन पार्टनर की तरफ से छोड़ी गई महिलाएं भरण-पोषण की हकदार होंगी।

यह कानून मुसलमानों के एक वर्ग में प्रचलित बहुविवाह और ‘हलाला’ पर भी प्रतिबंध लगाता है। हालांकि, यह कानून आदिवासियों पर उनकी परंपराओं, प्रथाओं और अनुष्ठानों के संरक्षण के लिए लागू नहीं होगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back To Top