राष्ट्रीय – News 303 https://news303.com National News Portal Thu, 22 Oct 2026 07:25:03 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.1.4 https://news303.com/wp-content/uploads/2023/12/cropped-News-303-Logo-01-32x32.png राष्ट्रीय – News 303 https://news303.com 32 32 राजधानी में डेंगू का प्रकोप तेज: अक्तूबर के पहले 17 दिनों में मिले 304 मरीज https://news303.com/dengue-outbreak-intensifies-in-the-capital-304-cases-reported-in-the-first-17-days-of-october/ Thu, 22 Oct 2026 07:25:03 +0000 https://news303.com/dengue-outbreak-intensifies-in-the-capital-304-cases-reported-in-the-first-17-days-of-october/ नई दिल्ली-  राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में डेंगू का डंक एक बार फिर तेजी से असर दिखा रहा है। अक्तूबर महीने में डेंगू के मामलों में बेतहाशा बढ़ोतरी दर्ज की गई है। नगर निगम की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, अक्तूबर के शुरुआती 17 दिनों में ही राजधानी में डेंगू के 304 नए मरीज सामने आ चुके हैं। निगम के रिकॉर्ड के मुताबिक, इस साल के किसी भी अन्य महीने की तुलना में यह आंकड़ा सबसे अधिक है।

इससे पहले सितंबर के महीने में डेंगू के 286 मामले दर्ज किए गए थे। इस प्रकार, अक्तूबर के अभी कई दिन बाकी होने के बावजूद यह महीना सितंबर को पीछे छोड़ चुका है और अब तक 18 अधिक मरीज मिल चुके हैं। अकेले पिछले एक हफ्ते के भीतर ही राजधानी में 102 नए मामले सामने आए हैं।

इस साल अब तक कुल 901 मामले

नगर निगम के आंकड़ों के अनुसार, 17 अक्तूबर तक दिल्ली में डेंगू के कुल 901 मामले दर्ज किए जा चुके हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि कुल मामलों का लगभग एक-तिहाई हिस्सा अकेले अक्तूबर के इन शुरुआती 10-15 दिनों में ही सामने आया है। हालांकि, इस बीच एक राहत भरी खबर यह है कि इस साल अब तक डेंगू संक्रमण के कारण किसी भी मरीज की मौत की सूचना नहीं मिली है।

क्षेत्रवार स्थिति: मध्य जोन सबसे ज्यादा प्रभावित

दिल्ली के विभिन्न जोनों से सामने आए आंकड़ों पर नजर डालें तो मध्य जोन में डेंगू का सबसे बुरा हाल है। यहाँ अब तक सबसे अधिक 110 मामले दर्ज किए गए हैं। इसके अलावा अन्य प्रमुख जोन इस प्रकार हैं:

नजफगढ़ जोन: 98 मामले

शाहदरा उत्तर जोन: 92 मामले

पश्चिम जोन: 91 मामले

दक्षिण जोन: 90 मामले

करोल बाग जोन: 60 मामले

सिविल लाइंस जोन: 56 मामले

रोहिणी और अन्य जोन: स्थिति नियंत्रण के प्रयास जारी हैं, जहाँ 32 से 51 के बीच मामले मिले हैं।

पिछले वर्षों से तुलना: राहत और चेतावनी दोनों

अगर पिछले साल की समान अवधि (17 अक्तूबर तक) से तुलना की जाए, तो इस वर्ष स्थिति थोड़ी बेहतर नजर आ रही है। पिछले साल इस अवधि तक 994 मामले दर्ज किए गए थे, जबकि इस साल यह संख्या 901 है।

लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि अक्तूबर के महीने में जिस रफ्तार से मामले बढ़ रहे हैं, वह चिंता का विषय है। पिछले वर्षों के आंकड़े भी गंभीर स्थिति की ओर इशारा करते हैं:

वर्ष 2023: 9,266 मामले और 19 मौतें

वर्ष 2024: 6,391 मामले और 11 मौतें

वर्ष 2025: 1,509 मामले और 4 मौतें

यद्यपि इस वर्ष अब तक शून्य मृत्यु दर एक राहत की बात है, फिर भी अक्तूबर में लगातार तेजी से बढ़ रहे मामलों को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग और नागरिकों को अत्यधिक सतर्कता बरतने की आवश्यकता है।

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पिनाराई विजयन को केरल हाई कोर्ट से बड़ा झटका, बेटी और दामाद की याचिकाएं भी खारिज https://news303.com/major-setback-for-pinarayi-vijayan-from-kerala-high-court-petitions-filed-by-his-daughter-and-son-in-law-also-dismissed/ Thu, 15 Oct 2026 07:02:24 +0000 https://news303.com/major-setback-for-pinarayi-vijayan-from-kerala-high-court-petitions-filed-by-his-daughter-and-son-in-law-also-dismissed/ सीएमआरएल घूस मामले में बढ़ीं पिनाराई विजयन की मुश्किलें

केरल। केरल के पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। कोचीन मिनरल्स एंड रूटाइल लिमिटेड (सीएमआरएल) से जुड़े कथित घूस मामले में उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के आदेश को चुनौती देने की कोशिश को केरल हाई कोर्ट से झटका लगा है। अदालत ने गुरुवार को विजयन, उनकी बेटी वीणा टी और दामाद पीए मोहम्मद रियास की अपील दायर करने की अनुमति मांगने वाली याचिकाएं खारिज कर दीं।

न्यायमूर्ति के. नटराजन और न्यायमूर्ति जॉनसन जॉन की पीठ ने कहा कि नौ अक्टूबर के आदेश से याचिकाकर्ताओं के कानूनी और संवैधानिक उपाय अपनाने के अधिकार प्रभावित नहीं हुए हैं। इसके साथ ही अदालत ने अपील की अनुमति देने से इनकार कर दिया।

विजयन, वीणा और रियास ने अपनी याचिकाओं में दलील दी थी कि एफआईआर दर्ज करने का आदेश देने से पहले एकल न्यायाधीश ने उनका पक्ष नहीं सुना। इससे पहले नौ अक्टूबर को न्यायमूर्ति ए. बदरुद्दीन ने वकील केएम शाहजहां की याचिका स्वीकार करते हुए मामले में एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया था।

ईडी की रिपोर्ट के आधार पर जांच की मांग

मामले की सुनवाई के दौरान प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने कहा था कि राज्य पुलिस के प्रमुख को सौंपी गई उसकी रिपोर्ट के आधार पर विजयन, उनकी बेटी और दामाद के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जा सकती है। एजेंसी का तर्क था कि रिपोर्ट को प्रारंभिक जांच का आधार मानते हुए पुलिस को आगे की कार्रवाई करनी चाहिए।

वहीं, राज्य सरकार ने इस मांग का विरोध करते हुए कहा था कि ईडी की रिपोर्ट अपने आप में एफआईआर दर्ज करने के लिए पर्याप्त नहीं है और मामले में पहले प्रारंभिक जांच की जानी चाहिए। हाल ही में केरल की कांग्रेस नेतृत्व वाली यूडीएफ सरकार ने ईडी के पत्र के आधार पर तीनों के खिलाफ पुलिस जांच का आदेश दिया था।

क्या है सीएमआरएल घूस मामला?

प्रवर्तन निदेशालय का आरोप है कि कोचीन मिनरल्स एंड रूटाइल लिमिटेड ने आईटी कंसल्टेंसी सेवाओं के नाम पर वीणा टी की बंद हो चुकी कंपनी ‘एक्सलॉजिक सॉल्यूशंस’ को कथित तौर पर 2.78 करोड़ रुपये का भुगतान किया। एजेंसी ने इस भुगतान को संदिग्ध बताते हुए मामले में कार्रवाई की मांग की है।

यह मामला धनशोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत ईडी की जांच और तलाशी के दौरान सामने आए तथ्यों से जुड़ा है। हालांकि, आरोपों की पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के जरिए होनी बाकी है।

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विधानसभा सत्र के समापन पर सुनील शर्मा का सरकार पर हमला, बोले- वादों पर खरा नहीं उतरी उमर सरकार https://news303.com/sunil-sharma-attacks-the-government-at-the-conclusion-of-the-assembly-session-says-the-omar-government-failed-to-live-up-to-its-promises/ Thu, 01 Oct 2026 11:32:16 +0000 https://news303.com/sunil-sharma-attacks-the-government-at-the-conclusion-of-the-assembly-session-says-the-omar-government-failed-to-live-up-to-its-promises/ श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर विधानसभा सत्र के अंतिम दिन नेता प्रतिपक्ष सुनील शर्मा ने उमर सरकार और विधानसभा अध्यक्ष पर चौतरफा हमला बोला। सत्र की समाप्ति के बाद मीडिया से बातचीत में शर्मा ने आरोप लगाया कि सरकार को बचाने की नीयत से ही जानबूझकर बेहद छोटा सत्र आयोजित किया गया था। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि सरकार ने चुनाव से पहले 100 वादे किए थे, लेकिन उनका रिपोर्ट कार्ड पूरी तरह शून्य रहा है।

नेता प्रतिपक्ष ने दावा किया कि सदन के भीतर सत्तापक्ष के विधायकों ने खुद ही अपनी सरकार के मंत्रियों को कटघरे में खड़ा कर दिया। इससे विपक्ष के उस आरोप पर मुहर लग गई कि वर्तमान सरकार पूरी तरह विफल और अप्रभावी साबित हुई है। विधानसभा में पारित प्रस्ताव पर कड़ा एतराज जताते हुए उन्होंने इसे असंवैधानिक, गैर-संसदीय और गैर-कानूनी करार दिया। शर्मा ने स्पष्ट किया कि जम्मू-कश्मीर में अलग संविधान या अलग झंडे जैसी बातों को किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा और इस मामले में जांच एजेंसियों से संज्ञान लेने की मांग की।

विधानसभा अध्यक्ष की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए शर्मा ने कहा कि अध्यक्ष ने संवैधानिक मर्यादा और गरिमा को ठेस पहुंचाई है। जिस प्रस्ताव को विधि विभाग और मुख्य सचिव ने अवैध ठहराया था, उसे भी सदन से पास करा दिया गया। इसके अलावा, उन्होंने मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला पर गोपनीयता की शपथ के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए कहा कि सीएम ने विधायकों की व्यक्तिगत बातचीत को सदन में उजागर करके मर्यादा लांघी है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि विपक्ष ने सत्तापक्ष के विधायकों की कही बातें सार्वजनिक कर दीं, तो मुख्यमंत्री का सदन में बैठना दुभर हो जाएगा। सुनील शर्मा ने ऐलान किया कि विपक्ष जल्द ही सरकार की नाकामियों को उजागर करने के लिए ‘प्रॉमिसिज वर्सेज परफॉर्मेंस’ का डोजियर जारी करेगा।

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इलाहाबाद हाईकोर्ट से शिक्षामित्रों को झटका: स्पेशल टीईटी में शामिल करने की मांग वाली याचिका खारिज https://news303.com/setback-for-shiksha-mitras-from-allahabad-high-court-petition-seeking-inclusion-in-special-tet-dismissed/ Thu, 01 Oct 2026 11:13:56 +0000 https://news303.com/setback-for-shiksha-mitras-from-allahabad-high-court-petition-seeking-inclusion-in-special-tet-dismissed/ प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों में कार्यरत शिक्षामित्रों को स्पेशल टीईटी 2026 में आवेदन का अवसर देने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी है। न्यायमूर्ति मंजू रानी चौहान की एकल पीठ ने वसीम अहमद और 220 अन्य की ओर से दाखिल याचिका पर फैसला सुनाया। इससे पहले 24 सितंबर को दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने आदेश सुरक्षित कर लिया था।

याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता जैन अब्बास ने दलील दी थी कि शिक्षामित्र लंबे समय से परिषदीय विद्यालयों में शिक्षण कार्य कर रहे हैं। याचिका में कहा गया कि बड़ी संख्या में शिक्षामित्र करीब 26 वर्षों से शिक्षण कार्य के साथ निर्वाचन ड्यूटी, जनगणना, मतगणना, एसआईआर, विद्यालय संचालन, विभिन्न परीक्षाओं में कक्ष निरीक्षक की जिम्मेदारी और विभागीय प्रशिक्षण जैसे कार्य भी करते आ रहे हैं।

याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि लंबे अनुभव और विभागीय प्रशिक्षण के बावजूद उन्हें स्पेशल टीईटी में आवेदन का अवसर नहीं दिया जा रहा है, जबकि अन्य श्रेणियों के कार्यरत शिक्षकों और विशेष शिक्षकों को परीक्षा में शामिल होने का अवसर दिया गया है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद टीईटी की अनिवार्यता को देखते हुए शिक्षामित्रों ने भविष्य में शिक्षण कार्य जारी रखने के लिए स्पेशल टीईटी में शामिल होने का अवसर देने की मांग की थी।

अदालत ने अपने निर्णय में कहा कि स्पेशल टीईटी को उन विशेष श्रेणी के इन-सर्विस शिक्षकों के लिए संक्रमणकालीन व्यवस्था के तौर पर देखा गया है, जो नियुक्ति के बाद टीईटी की अनिवार्यता के दायरे में आए। कोर्ट ने शिक्षामित्रों की सेवा की अलग कानूनी स्थिति का भी उल्लेख किया और कहा कि केवल सामान्य टीईटी में बैठने की पात्रता के आधार पर उन्हें स्पेशल टीईटी में शामिल होने का अधिकार नहीं दिया जा सकता।

कोर्ट ने शिक्षामित्रों को स्पेशल टीईटी में शामिल करने की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया। मामले में याचिकाकर्ताओं की ओर से वसीम अहमद समेत कुल 221 लोगों ने अदालत का रुख किया था।

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सीएम योगी ने 87 इंटरसेप्टर वाहनों को दिखाई हरी झंडी, पुलिस सुधारों पर गिनाए सरकार के कदम https://news303.com/cm-yogi-flags-off-87-interceptor-vehicles-highlights-governments-measures-for-police-reforms/ Thu, 01 Oct 2026 10:29:56 +0000 https://news303.com/cm-yogi-flags-off-87-interceptor-vehicles-highlights-governments-measures-for-police-reforms/ लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को लोकभवन में आयोजित कार्यक्रम में प्रदेश की कानून-व्यवस्था और पुलिस व्यवस्था को लेकर सरकार के कदमों का उल्लेख किया। उन्होंने 2017 से पहले की स्थिति पर टिप्पणी करते हुए कहा कि उस दौर में कई जिलों में माफिया का प्रभाव था और पुलिस के सामने भी कई चुनौतियां थीं। मुख्यमंत्री ने कहा कि राजनीतिक नेतृत्व में निर्णय लेने की क्षमता कमजोर हो तो कानून-व्यवस्था को प्रभावी तरीके से संभालना मुश्किल होता है।

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने अत्याधुनिक उपकरणों से लैस 87 इंटरसेप्टर वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इनमें चारपहिया और दोपहिया वाहन शामिल हैं। इनका इस्तेमाल यातायात निगरानी, सड़क सुरक्षा और पुलिस की प्रवर्तन क्षमता को मजबूत करने के लिए किया जाएगा।

इस मौके पर पुलिसकर्मियों का पदक अलंकरण भी हुआ। मुख्यमंत्री ने पूर्व डीजीपी प्रकाश सिंह की पुस्तक ‘संघर्ष’ का विमोचन किया। कार्यक्रम में पुलिस सुधारों, पुलिसिंग में तकनीक के इस्तेमाल और सड़क सुरक्षा से जुड़े विषयों पर भी चर्चा हुई।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने 2017 के बाद पुलिस सुधारों को आगे बढ़ाने पर काम किया है। उन्होंने पूर्व डीजीपी प्रकाश सिंह के पुलिस सुधारों से जुड़े प्रयासों का उल्लेख करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश ने पुलिस व्यवस्था में सुधार लागू करने की दिशा में कदम उठाए हैं।

उन्होंने प्रदेश में पुलिस कमिश्नरेट व्यवस्था का भी जिक्र किया। मुख्यमंत्री के अनुसार, वर्तमान पुलिसिंग में विचार, साहस और तकनीक के समन्वय पर जोर दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सुरक्षित वातावरण में ही विकास और सामाजिक गतिविधियों को आगे बढ़ाया जा सकता है।

योगी आदित्यनाथ ने पुलिसिंग में तकनीक के इस्तेमाल को भी महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने सेफ सिटी परियोजना के तहत लगाए गए कैमरों और जिलों में स्थापित इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर का उल्लेख किया। उनके मुताबिक, आधुनिक तकनीक पुलिस को अपराध की रोकथाम और घटनाओं की जांच में मदद कर रही है।

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने एसटीएफ के दिवंगत इंस्पेक्टर सुनील कुमार सिंह की वीरता को याद किया। उन्होंने बताया कि सुनील कुमार सिंह को भारत सरकार की ओर से कीर्ति चक्र से सम्मानित किया गया है। मुख्यमंत्री ने उनके परिवार के सदस्यों को सम्मानित करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की।

मुख्यमंत्री ने बताया कि कार्यक्रम में 16 पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को राष्ट्रपति के वीरता पुरस्कार तथा 10 पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को मुख्यमंत्री वीरता पदक से सम्मानित किया गया।

मुख्यमंत्री ने सड़क दुर्घटनाओं को भी बड़ी चुनौती बताया। उन्होंने कहा कि सड़क सुरक्षा को बेहतर बनाने के लिए तकनीक और प्रभावी प्रवर्तन जरूरी है। इसी उद्देश्य से अत्याधुनिक इंटरसेप्टर वाहनों को पुलिस व्यवस्था में शामिल किया गया है।

कार्यक्रम में रवाना किए गए 87 वाहनों के जरिए यातायात नियमों के पालन, निगरानी और सड़क सुरक्षा से जुड़े कार्यों को मजबूत करने पर जोर दिया जाएगा।

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सारण में बाढ़ का बढ़ा खतरा, 48 गांव प्रभावित; 33 नाव और बोट एंबुलेंस से राहत कार्य जारी https://news303.com/flood-threat-escalates-in-saran-48-villages-affected-relief-operations-underway-using-33-boats-and-boat-ambulances/ Thu, 01 Oct 2026 07:31:18 +0000 https://news303.com/flood-threat-escalates-in-saran-48-villages-affected-relief-operations-underway-using-33-boats-and-boat-ambulances/ छपरा (सारण)। गंडक नदी के बढ़ते जलस्तर के चलते बिहार के सारण जिले में बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी हुई है। प्रशासन ने जिले के पांच प्रखंडों को बाढ़ प्रभावित घोषित करते हुए राहत और बचाव कार्य तेज कर दिए हैं। बुधवार शाम चार बजे तक 18 पंचायतों के 48 गांव बाढ़ की चपेट में थे। इन क्षेत्रों में करीब 24,725 लोग और 4,220 परिवार प्रभावित बताए गए हैं।

जिलाधिकारी वैभव श्रीवास्तव के निर्देश पर संबंधित विभागों के अधिकारी और कर्मचारी प्रभावित इलाकों में लगातार निगरानी कर रहे हैं। जलस्तर और स्थानीय परिस्थितियों को देखते हुए राहत-बचाव के संसाधनों को सक्रिय किया जा रहा है। प्रशासन की प्राथमिकता प्रभावित परिवारों तक भोजन, चिकित्सा सुविधा और आवश्यक राहत सामग्री पहुंचाना है।

33 नाव और बोट एंबुलेंस तैनात

बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में आवागमन और राहत सामग्री पहुंचाने के लिए 33 नावों की व्यवस्था की गई है। इसके अलावा एक बोट एंबुलेंस भी संचालित की जा रही है। स्वास्थ्य सेवाओं के लिए पांच चिकित्सा शिविर लगाए गए हैं, जबकि पशुओं के इलाज के लिए पशु चिकित्सा सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है। राहत कार्यों के लिए एक राहत केंद्र संचालित है, जहां फिलहाल 50 लोग आश्रय लिए हुए हैं। आपात स्थिति से निपटने के लिए तीन एनडीआरएफ/एसडीआरएफ टीमें भी उपलब्ध हैं। अब तक प्रभावित परिवारों को 950 पॉलीथिन शीट वितरित की जा चुकी हैं।

14 सामुदायिक रसोई में पांच हजार लोगों के भोजन की व्यवस्था

बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए पानापुर, तरैया, अमनौर, मकेर और परसा प्रखंडों में 14 सामुदायिक रसोई संचालित की जा रही हैं। इनके जरिए करीब पांच हजार लोगों के लिए भोजन तैयार किया जा रहा है। पानापुर में दो, तरैया में तीन, अमनौर में एक, मकेर में पांच और परसा में तीन सामुदायिक रसोई चल रही हैं।

तरैया में चंचलिया, माधोपुर और भटगाई में रसोई संचालित है। वहीं मकेर के बाघाकोल, कस्बा मकेर, भाथा और पीर मकेर समेत प्रभावित क्षेत्रों में लोगों को भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है।

प्रशासन ने नदी और तटबंध के संवेदनशील इलाकों में विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं। लोगों से नदी और तटबंध के आसपास अनावश्यक आवाजाही से बचने तथा किसी भी आपात स्थिति में तत्काल स्थानीय प्रशासन को सूचना देने की अपील की गई है। जलस्तर और बाढ़ की स्थिति के अनुसार राहत एवं बचाव कार्यों को आगे बढ़ाया जाएगा।

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फॉर्म-6 में बदलाव को लेकर राहुल गांधी के सवाल, चुनाव आयोग और TCS पर उठाई आपत्ति https://news303.com/rahul-gandhi-questions-changes-to-form-6-raises-objections-against-the-election-commission-and-tcs/ Thu, 01 Oct 2026 07:00:02 +0000 https://news303.com/rahul-gandhi-questions-changes-to-form-6-raises-objections-against-the-election-commission-and-tcs/ नई दिल्ली। कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने मतदाता पंजीकरण से जुड़े फॉर्म-6 में किए गए बदलाव को लेकर चुनाव आयोग से सवाल पूछे हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए जानना चाहा कि फॉर्म में बदलाव का निर्देश किसने दिया और इसे लागू करने की प्रक्रिया में टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) की क्या भूमिका रही। राहुल गांधी ने दावा किया कि फॉर्म-6 में किया गया बदलाव नियमों के खिलाफ था और चुनाव आयोग के दो आयुक्तों ने भी इस पर आपत्ति जताई थी।

राहुल गांधी ने अपने पोस्ट में TCS से जुड़े सवाल भी उठाए। उन्होंने पूछा कि चुनाव आयोग में किसने कंपनी को यह बदलाव करने का निर्देश दिया और TCS की ओर से इस पर किसने हस्ताक्षर किए। उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि क्या कंपनी पर बदलाव लागू करने का दबाव था। ये सवाल ऐसे समय आए हैं जब विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर चुनाव आयोग और विपक्ष के बीच राजनीतिक बहस जारी है।

दरअसल, ऑनलाइन फॉर्म-6 में SIR से संबंधित एक अतिरिक्त घोषणा जोड़ी गई थी। इसमें नए मतदाताओं से पिछली मतदाता सूची में अपने या परिवार के सदस्यों के नाम से संबंधित जानकारी देने को कहा गया था। चुनाव आयोग ने बाद में उन राज्यों में इस अतिरिक्त घोषणा को हटा दिया, जहां SIR की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है।

चुनाव आयोग के मुताबिक, मूल वैधानिक फॉर्म-6 में बदलाव नहीं किया गया था, बल्कि SIR के दौरान एक अलग घोषणा जोड़ी गई थी। आयोग ने SIR पूरा कर चुके राज्यों में इस अतिरिक्त घोषणा को वापस ले लिया है। वहीं, जिन राज्यों में SIR की प्रक्रिया चल रही है, वहां इससे जुड़ी व्यवस्था लागू रहने की जानकारी सामने आई है।

फॉर्म-6 नए मतदाताओं के नाम मतदाता सूची में शामिल कराने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। चुनाव आयोग के नागरिक सेवा पोर्टल पर भी नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए फॉर्म-6 की सुविधा उपलब्ध है।

फॉर्म-6 के मुद्दे पर सामने आए विवाद के बीच विपक्षी दल SIR प्रक्रिया और मतदाता सूची में बदलाव को लेकर चुनाव आयोग से पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं। विपक्षी गठबंधन ने इस मुद्दे को लेकर देशभर में विरोध कार्यक्रम शुरू करने की घोषणा भी की है।

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‘तकनीक नहीं, कानून का पालन जरूरी’, एसआईआर प्रक्रिया पर बॉम्बे हाईकोर्ट की चुनाव आयोग को फटकार https://news303.com/adherence-to-law-not-technology-is-essential-bombay-high-court-reprimands-election-commission-over-sir-process/ Thu, 01 Oct 2026 06:40:29 +0000 https://news303.com/adherence-to-law-not-technology-is-essential-bombay-high-court-reprimands-election-commission-over-sir-process/ गोवा में एसआईआर पर बॉम्बे हाईकोर्ट सख्त, एक परिवार के 6 वोटरों के नाम हटने पर चुनाव आयोग से जवाब-तलब

मुंबई। गोवा में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान एक ही परिवार के छह सदस्यों के नाम वोटर लिस्ट से हटाए जाने का मामला बॉम्बे हाईकोर्ट पहुंच गया है। सुनवाई में अदालत ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए। हाईकोर्ट ने स्पष्ट कहा कि मतदाता सूची में संशोधन के लिए तकनीक को कानून से ऊपर नहीं रखा जा सकता। साथ ही आयोग को यह सुनिश्चित करना होगा कि किसी भी पात्र मतदाता का नाम सूची से न छूटे।

एसआईआर प्रक्रिया में गड़बड़ी पर हाईकोर्ट सख्त

मामले की सुनवाई कर रही जस्टिस वाल्मीकि मेनेजेस और जस्टिस अमित जामसांडेकर की खंडपीठ ने चुनाव आयोग से पूछा कि आखिर किस कानूनी प्रावधान के तहत बिना सुनवाई का अवसर दिए मतदाताओं के नाम हटाए गए। अदालत ने जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 और मतदाता पंजीकरण नियमों का हवाला देते हुए एसआईआर प्रक्रिया में सामने आई खामियों पर स्पष्टीकरण मांगा।

सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि चुनाव आयोग की कोई भी प्रक्रिया कानून और नियमों को निष्प्रभावी नहीं कर सकती। यदि किसी मतदाता का नाम हटाया जाना है तो उससे पहले उसे अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाना चाहिए। अदालत ने आयोग से यह भी पूछा कि बिना सुनवाई के नाम हटाने का अधिकार उसे किस कानून के तहत मिला है।

एक ही परिवार के छह सदस्यों के नाम हटाए गए

यह मामला गोवा के सांता क्रूज विधानसभा क्षेत्र का है, जहां एक ही परिवार के छह सदस्यों के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए। खास बात यह है कि परिवार के सदस्यों ने अपना पता बदलने की जानकारी चुनाव आयोग को फॉर्म-8 के माध्यम से दी थी। इसके बावजूद उनके नाम सूची से हटा दिए गए।

चुनाव आयोग की ओर से पेश वकील गौरीश अग्नि ने अदालत को बताया कि एसआईआर प्रक्रिया के दौरान संबंधित सॉफ्टवेयर में फॉर्म-8 पर कार्रवाई करने की सुविधा उपलब्ध नहीं थी। इसी तकनीकी समस्या के कारण परिवार के सदस्यों के नाम मतदाता सूची से हट गए और निर्धारित अवधि में उनके आवेदन पर कोई बदलाव नहीं किया जा सका।

तकनीक के बजाय कानून के पालन पर जोर

चुनाव आयोग की दलीलों पर सवाल उठाते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि कानून हर समय प्रभावी रहना चाहिए। सॉफ्टवेयर के संचालन और उसमें बदलाव करने का अधिकार संबंधित निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (ईआरओ) के पास होना चाहिए, ताकि वह अपने कानूनी आदेशों के अनुसार जरूरी संशोधन कर सके। अदालत ने कहा कि सॉफ्टवेयर किसी तीसरे पक्ष के नियंत्रण में नहीं होना चाहिए।

खंडपीठ ने टिप्पणी की कि तकनीक का इस्तेमाल मतदाताओं के हितों की रक्षा के लिए होना चाहिए, न कि उनके अधिकारों में बाधा डालने के लिए। चुनाव आयोग की जिम्मेदारी है कि कोई भी पात्र मतदाता अपने मताधिकार से वंचित न रहे।

अदालत ने पूछा, ऐसे कितने मामले सामने नहीं आए?

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने एसआईआर प्रक्रिया में सॉफ्टवेयर की सीमाओं के कारण फॉर्म-8 पर कार्रवाई नहीं होने को गंभीर मुद्दा बताया। अदालत ने कहा कि इस तरह की व्यवस्था से ऐसा प्रतीत होता है कि कुछ समय के लिए कानून और नियमों को दरकिनार कर दिया गया है और एक अलग प्रक्रिया लागू कर दी गई है।

खंडपीठ ने इस मामले पर चिंता जताते हुए कहा कि फिलहाल अदालत के सामने छह मतदाताओं का मामला है, लेकिन ऐसे कितने अन्य लोग होंगे, जिनके नाम भी इसी तरह मतदाता सूची से हटा दिए गए होंगे और जो न्याय पाने के लिए अदालत तक नहीं पहुंच सके। अदालत ने इस पूरे मामले के प्रभाव को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की।

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बड़गाईं जमीन मामले में हेमंत सोरेन के खिलाफ आरोप तय, 17 आरोपियों पर चलेगा ट्रायल https://news303.com/charges-framed-against-hemant-soren-in-the-bargain-land-case-trial-to-proceed-against-17-accused/ Wed, 30 Sep 2026 12:21:02 +0000 https://news303.com/charges-framed-against-hemant-soren-in-the-bargain-land-case-trial-to-proceed-against-17-accused/ रांची। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के खिलाफ बड़गाईं अंचल की 8.86 एकड़ जमीन से जुड़े कथित जमीन फर्जीवाड़े और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में विशेष पीएमएलए अदालत ने आरोप तय कर दिए हैं। इसके साथ ही मामले में हेमंत सोरेन समेत कुल 17 आरोपियों के खिलाफ ट्रायल की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। इससे पहले 16 आरोपियों के खिलाफ आरोप गठित किए जा चुके थे। हालिया सुनवाई से पहले अदालत ने 30 सितंबर को आरोप तय करने की कार्यवाही निर्धारित की थी।

आरोप गठन के समय हेमंत सोरेन वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अदालत में पेश हुए। अदालत ने उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों को पढ़कर सुनाया। सोरेन ने आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि उन्होंने कोई अपराध नहीं किया है।

मामला रांची के बड़गाईं अंचल में स्थित करीब 8.86 एकड़ जमीन से संबंधित है। प्रवर्तन निदेशालय की जांच में जमीन के रिकॉर्ड में कथित हेरफेर, फर्जी दस्तावेज तैयार करने और जमीन पर कथित अवैध कब्जे से जुड़े पहलुओं की जांच की गई है। ईडी ने इस मामले को धन शोधन से भी जोड़ा है। ईडी ने अप्रैल 2024 में इस जमीन को लेकर अभियोजन शिकायत दाखिल की थी और जमीन की कीमत करीब 31.07 करोड़ रुपये आंकी थी।

मामले में भानु प्रताप प्रसाद, अंतू तिर्की, विनोद कुमार सिंह, बिजेंद्र सिंह, बिपिन सिंह, प्रियरंजन सहाय, मनोज कुमार यादव, कुमार राजश्री, राजकुमार पाहन, संजीत कुमार, शेखर कुशवाहा, तापस घोष, मोहम्मद इरशाद अख्तर, अफसर अली, मोहम्मद सद्दाम हुसैन और मोहम्मद इरशाद समेत अन्य आरोपियों के खिलाफ पहले ही आरोप तय किए जा चुके हैं।

आरोप गठन के बाद अब मामले की सुनवाई आगे बढ़ेगी। आरोप तय होना किसी आरोपी के दोषी साबित होने के समान नहीं है। ट्रायल के दौरान अभियोजन और बचाव पक्ष को अपने-अपने साक्ष्य और दलीलें रखने का अवसर मिलेगा। अंतिम दोषसिद्धि या बरी होने का निर्णय न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद होगा।

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जालंधर में अमित शाह का ऐलान, भाजपा सरकार बनी तो 2029 तक पंजाब को नशा मुक्त करने का लक्ष्य https://news303.com/amit-shahs-announcement-in-jalandhar-if-the-bjp-forms-the-government-the-goal-is-to-make-punjab-drug-free-by-2029/ Wed, 30 Sep 2026 10:39:42 +0000 https://news303.com/amit-shahs-announcement-in-jalandhar-if-the-bjp-forms-the-government-the-goal-is-to-make-punjab-drug-free-by-2029/ जालंधर: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने आज जालंधर के परागपुर में आयोजित ‘नशा मुक्त महारैली’ को संबोधित करते हुए एक बड़ा राजनीतिक एलान किया। शाह ने मंच से वादा किया कि यदि पंजाब में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सरकार बनती है, तो 31 दिसंबर 2029 से पहले पूरे राज्य को पूरी तरह से नशा मुक्त और ‘चिट्टा मुक्त’ बना दिया जाएगा।

जनसभा को संबोधित करते हुए गृह मंत्री ने राज्य की वर्तमान आम आदमी पार्टी सरकार पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि आज पंजाब में चिट्टे (नशे) का व्यापार खुलेआम चल रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि आगामी चुनाव में भले ही किसानों, उद्योग, कानून-व्यवस्था और महिला सुरक्षा जैसे कई अहम मुद्दे हों, लेकिन भाजपा का मुख्य एजेंडा केवल और केवल ‘नशा मुक्त पंजाब’ रहेगा। शाह ने राज्य के युवाओं और माताओं से भाजपा का समर्थन करने की अपील की।

 पंजाब के ऐतिहासिक महत्व को रेखांकित करते हुए अमित शाह ने कहा कि पंजाब देश में दो प्रमुख बातों के लिए जाना जाता है— पहला, देश का अन्न भंडार भरने वाले यहां के मेहनती किसान, और दूसरा, देश की सीमाओं की रक्षा में सर्वोच्च बलिदान देने वाले पंजाब के वीर जवान। उन्होंने कहा कि आजादी के आंदोलन से लेकर सीमाओं की सुरक्षा तक, पंजाबियों के योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता।

 विपक्षी दलों के बयानों का जवाब देते हुए गृह मंत्री ने कहा कि भाजपा अपने वादों को पूरा करने के लिए जानी जाती है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जिस तरह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जम्मू-कश्मीर से आतंकवाद, देश से नक्सलवाद और उत्तर-पूर्व (नॉर्थ ईस्ट) से उग्रवाद को समाप्त किया गया है, ठीक उसी तरह अब पंजाब को भी नशे की जाल से पूरी तरह आजाद कराया जाएगा।

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