2024 में कनखल स्थित श्रद्धा भक्ति आश्रम में हुई थी 73 वर्षीय महंत की हत्या, लंबे समय से फरार चल रहा था आरोपी
उत्तराखण्ड STF ने मैनुअल पुलिसिंग और इनपुट के आधार पर की गिरफ्तारी, हत्याकांड में अब तक छह आरोपियों के नाम आए सामने
देहरादून/हरिद्वार। उत्तराखण्ड स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने वर्ष 2024 के बहुचर्चित महंत गोविन्द दास हत्याकांड में बड़ी सफलता हासिल की है। STF की टीम ने मामले में लंबे समय से फरार चल रहे ₹50 हजार के इनामी आरोपी प्रदीप को चंडीगढ़, पंजाब से गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी हरिद्वार के कनखल थाना क्षेत्र में दर्ज हत्या के मुकदमे में वांछित था।
STF के अनुसार, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर सक्रिय गैंग, गैंगस्टर और इनामी अपराधियों के विरुद्ध लगातार कार्रवाई की जा रही है। इसी क्रम में कनखल थाने में दर्ज मुकदमा संख्या 337/2024 के तहत वांछित आरोपी की तलाश की जा रही थी। प्रभावी पतारसी-सुरागरसी, मैनुअल पुलिसिंग और विकसित किए गए इनपुट के आधार पर STF टीम ने आरोपी को चंडीगढ़ से गिरफ्तार करने में सफलता प्राप्त की।
श्रद्धा भक्ति आश्रम में हुई थी महंत की हत्या
पुलिस के मुताबिक, वर्ष 2024 में हरिद्वार के कनखल क्षेत्र स्थित श्रद्धा भक्ति आश्रम में गुरुजी महंत गोविन्द दास के शिष्य विशम्बर दास (करीब 73 वर्ष) की हत्या कर दी गई थी। इस मामले में कुल छह आरोपी प्रकाश में आए थे। इनमें से चार आरोपियों को हरिद्वार पुलिस पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है, जबकि एक अन्य आरोपी सौरभ उर्फ नीटू को STF ने 20 सितंबर 2026 को बागपत से गिरफ्तार किया था।
मामले में प्रदीप लंबे समय से फरार चल रहा था। उसकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस द्वारा लगातार प्रयास किए जा रहे थे। वांछित आरोपियों के घरों की कुर्की की कार्रवाई भी की जा चुकी थी और प्रदीप की गिरफ्तारी पर ₹50 हजार का इनाम घोषित किया गया था।
पंजाब में डिलीवरी का काम कर रहा था आरोपी
STF के अनुसार, गिरफ्तार आरोपी प्रदीप पुत्र बृजपाल, निवासी ऊदपुर, झिंझाना, शामली (उत्तर प्रदेश), उम्र करीब 30 वर्ष है। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, वह पंजाब में छोटा हाथी वाहन से माल की डिलीवरी का काम कर रहा था। लगातार निगरानी, प्राप्त इनपुट और मैनुअल पुलिसिंग के आधार पर टीम ने उसकी लोकेशन का पता लगाकर उसे गिरफ्तार किया।
हत्या समेत इन धाराओं में दर्ज है मुकदमा
आरोपी के विरुद्ध थाना कनखल, जनपद हरिद्वार में मुकदमा संख्या 337/2024 के तहत भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 302 (हत्या), 201 (साक्ष्य मिटाना), 120बी (आपराधिक षड्यंत्र) और 34 (साझा मंशा) में अभियोग दर्ज है।
STF की टीम रही शामिल
इस कार्रवाई में STF की टीम से निरीक्षक अबुल कलाम, उपनिरीक्षक नरोत्तम सिंह बिष्ट, अपर उपनिरीक्षक हितेश कुमार, हेड कांस्टेबल संजय कुमार, वीरेंद्र नौटियाल, बृजेन्द्र सिंह चौहान तथा कांस्टेबल अनिल कुमार और मोहन असवाल शामिल रहे।


