गर्दन का दर्द समझकर न करें नजरअंदाज, लंबे स्क्रीन टाइम से बढ़ सकती है सर्वाइकल की समस्या

आज के समय में लंबे वक्त तक कंप्यूटर, लैपटॉप और मोबाइल का इस्तेमाल करने की वजह से युवाओं में गर्दन और कंधों से जुड़ी परेशानियां बढ़ रही हैं। कई लोग गर्दन में होने वाले दर्द और जकड़न को थकान या गलत तरीके से सोने का असर मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। हालांकि, अगर दर्द बार-बार हो रहा है या लंबे समय तक बैठने के बाद गर्दन-कंधों में भारीपन महसूस होता है, तो इसके पीछे सर्वाइकल स्पाइन से जुड़ी समस्या भी हो सकती है।

सर्वाइकल की परेशानी में गर्दन में दर्द, अकड़न और भारीपन जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। कई बार यह दर्द कंधे, हाथ या सिर तक भी पहुंच जाता है। गलत पॉश्चर में लंबे समय तक बैठना, मांसपेशियों पर लगातार दबाव, तनाव और चोट इसके प्रमुख कारणों में शामिल हो सकते हैं। कुछ मामलों में रीढ़ की डिस्क या नस पर दबाव पड़ने से भी दर्द, झनझनाहट और कमजोरी जैसी समस्या हो सकती है।

लंबे समय तक स्क्रीन देखना बढ़ा रहा परेशानी

ऑफिस या घर पर लगातार कई घंटे कंप्यूटर और लैपटॉप के सामने बैठना गर्दन के लिए नुकसानदायक हो सकता है। खासकर स्क्रीन नीचे होने पर बार-बार गर्दन झुकाकर काम करने से गर्दन और कंधों की मांसपेशियों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। एक ही मुद्रा में लंबे समय तक बैठे रहने से धीरे-धीरे मांसपेशियों में खिंचाव और जकड़न बढ़ सकती है।

विशेषज्ञों के मुताबिक, कंप्यूटर स्क्रीन को लगभग आंखों के स्तर पर रखना और काम के दौरान छोटे-छोटे ब्रेक लेना जरूरी है। कुछ देर के अंतराल पर उठकर चलना और गर्दन-कंधों को आराम देना भी मददगार हो सकता है।

तनाव और चोट भी हो सकती है वजह

गर्दन में दर्द का संबंध केवल गलत पॉश्चर से नहीं होता। लगातार तनाव में रहने से शरीर की मांसपेशियों में खिंचाव बढ़ सकता है, जिसका असर गर्दन और कंधों पर दिखाई देता है। वहीं गिरने, खेल के दौरान लगी चोट या रीढ़ की किसी समस्या के बाद भी गर्दन में दर्द शुरू हो सकता है।

अगर गर्दन के दर्द के साथ हाथ में झनझनाहट, सुन्नपन या कमजोरी महसूस हो रही है, तो इसे नजरअंदाज करने के बजाय चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।

रोजमर्रा की आदतों में करें बदलाव

गर्दन की परेशानी से बचने के लिए काम करते समय पीठ और गर्दन को सही स्थिति में रखना चाहिए। डेस्क और कुर्सी की ऊंचाई ऐसी होनी चाहिए कि लंबे समय तक काम करते समय शरीर पर अनावश्यक दबाव न पड़े। मोबाइल चलाते समय लगातार गर्दन झुकाकर बैठने से भी बचना चाहिए।

काम के बीच छोटे ब्रेक लेने, हल्की शारीरिक गतिविधि करने और बिना जोर लगाए गर्दन को धीरे-धीरे दाएं-बाएं घुमाने जैसे हल्के मूवमेंट किए जा सकते हैं। नियमित व्यायाम मांसपेशियों को मजबूत बनाए रखने में मदद कर सकता है। सोते समय भी गर्दन को ऐसी स्थिति में रखना चाहिए, जिससे उस पर अतिरिक्त दबाव न पड़े।

यदि गर्दन का दर्द लगातार बना हुआ है, बार-बार लौट रहा है या इसके साथ हाथ-पैर में कमजोरी, सुन्नपन या झनझनाहट जैसे लक्षण दिखाई दे रहे हैं, तो डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से जांच कराना बेहतर है।

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