Headline
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने दिया अपने पद से इस्तीफा
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने दिया अपने पद से इस्तीफा
क्राइम मीटिंग में एसएसपी का कडा रूख, लापरवाही बरतने वाले थाना प्रभारियों को दी सख्त हिदायत
क्राइम मीटिंग में एसएसपी का कडा रूख, लापरवाही बरतने वाले थाना प्रभारियों को दी सख्त हिदायत
भारत का विदेशी मुद्रा भंडार बढ़कर 676.23 अरब डॉलर पहुंचा, आरबीआई के ताजा आंकड़े जारी
भारत का विदेशी मुद्रा भंडार बढ़कर 676.23 अरब डॉलर पहुंचा, आरबीआई के ताजा आंकड़े जारी
भारत और जिम्बाब्वे के बीच तीन मैचों की टी20 सीरीज का दूसरा मुकाबला आज
भारत और जिम्बाब्वे के बीच तीन मैचों की टी20 सीरीज का दूसरा मुकाबला आज
‘जन नायकन’ का बॉक्स ऑफिस पर जलवा, दो दिन में पार किया 50 करोड़ का आंकड़ा
‘जन नायकन’ का बॉक्स ऑफिस पर जलवा, दो दिन में पार किया 50 करोड़ का आंकड़ा
मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन की अध्यक्षता में हुई व्यय वित्त समिति की बैठक
मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन की अध्यक्षता में हुई व्यय वित्त समिति की बैठक
ड्रग्स के खिलाफ जीरो टॉलरेंसः हर युवा का भविष्य बचाना हमारी प्राथमिकता- डीएम
ड्रग्स के खिलाफ जीरो टॉलरेंसः हर युवा का भविष्य बचाना हमारी प्राथमिकता- डीएम
उत्तराखंड पुलिस के निलंबित सिपाही शेर सिंह के तथाकथित “इस्तीफे” को लेकर उठे सवाल
उत्तराखंड पुलिस के निलंबित सिपाही शेर सिंह के तथाकथित “इस्तीफे” को लेकर उठे सवाल
राज्यसभा में डॉ. नरेश बंसल ने उठाया नेशनल हाई-स्पीड कॉरिडोर का मुद्दा, गडकरी ने दी परियोजनाओं की प्रगति रिपोर्ट
राज्यसभा में डॉ. नरेश बंसल ने उठाया नेशनल हाई-स्पीड कॉरिडोर का मुद्दा, गडकरी ने दी परियोजनाओं की प्रगति रिपोर्ट

सर्दियों में बारिश नहीं होने से किसानों की बढ़ी टेंशन, उत्तराखंड में सूखे जैसे हालात 

सर्दियों में बारिश नहीं होने से किसानों की बढ़ी टेंशन, उत्तराखंड में सूखे जैसे हालात 

देहरादून। जनवरी बीतने को है लेकिन इंद्र देव मेहरबान नहीं हुए हैं। इस वजह से सूखे के हालात पैदा हो गए हैं। सूखे के नुकसान का आंकलन करने की जिम्मेदारी तीन विभागों को दी गई है। उत्तराखंड के कई पर्वतीय जिलों में सूखे जैसे हालत से किसान भी परेशान हैं।
चम्पावत में बीते चार माह में महज 17.50 एमएम बारिश हुई है। सूखे से गेहूं, मसूर और सरसों सूखने के कगार पर है। चम्पावत में बीते चार माह में महज 17.5 एमएम बारिश हुई है। इससे सूखे के हालात पैदा हो गए हैं।

जिला आपदा प्रबंधन कार्यालय से मिली जानकारी के मुताबिक अक्तूबर में 15.50, नवंबर, दिसंबर और जनवरी में अब तक शून्य एमएम बारिश हुई है। बारिश नहीं होने से गेहूं, मसूर और सरसों की खेती पर असर पड़ रहा है। इसके अलावा खेत में उगी सब्जियों को भी नुकसान पहुंच रहा है। इससे किसानों की चिंता भी बढ़ रही है। जिले में करीब 1700 हेक्टेयर क्षेत्र में गेहूं, मसूर और सरसों खेती की जाती है।

चम्पावत में बीते चार वर्ष के दौरान अंतिम माह में कम बारिश हुई है। जिला आपदा नियंत्रण कक्ष से मिली जानकारी के मुताबिक वर्ष 2018 के आखिरी तीन महीने अक्तूबर, नवंबर और दिसंबर में 27 एमएम बारिश हुई। 2019 में 19 एमएम, वर्ष 2020 में महज एक एमएम बारिश हुई। इसके अलावा वर्ष 2021 में अक्तूबर में 501 एमएम, नवंबर में शून्य, दिसंबर में छह एमएम बारिश दर्ज की गई। वर्ष 2022 में अक्टूबर में 210, नवंबर में चार और दिसंबर में शून्य बारिश हुई।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back To Top