Headline
अजिंक्य रहाणे ने क्रिकेट को कहा अलविदा, सभी प्रारूपों से संन्यास का किया ऐलान
अजिंक्य रहाणे ने क्रिकेट को कहा अलविदा, सभी प्रारूपों से संन्यास का किया ऐलान
‘रामायण’ का दमदार ट्रेलर रिलीज, रावण के अवतार में यश ने बटोरी सुर्खियां
‘रामायण’ का दमदार ट्रेलर रिलीज, रावण के अवतार में यश ने बटोरी सुर्खियां
भीमताल से नौकुचियाताल मोटर मार्ग पर डामरीकरण के लिए 2करोड़ 45लाख स्वीकृत, जल्दी शुरू होगा डामरीकरण व सुधारीकरण का कार्य- राम सिंह कैड़ा
भीमताल से नौकुचियाताल मोटर मार्ग पर डामरीकरण के लिए 2करोड़ 45लाख स्वीकृत, जल्दी शुरू होगा डामरीकरण व सुधारीकरण का कार्य- राम सिंह कैड़ा
देवराना गांव में गुलदार के आतंक से ग्रामीणों में आक्रोश, वन विभाग के खिलाफ प्रदर्शन
देवराना गांव में गुलदार के आतंक से ग्रामीणों में आक्रोश, वन विभाग के खिलाफ प्रदर्शन
स्वतंत्रता दिवस के उपलक्ष्य में ‘हर घर तिरंगा’ अभियान की तैयारियां तेज
स्वतंत्रता दिवस के उपलक्ष्य में ‘हर घर तिरंगा’ अभियान की तैयारियां तेज
एचआईवी/एड्स मुक्त देहरादून का संकल्प, रोकथाम से उपचार तक कसेगा प्रशासन का शिकंजा
एचआईवी/एड्स मुक्त देहरादून का संकल्प, रोकथाम से उपचार तक कसेगा प्रशासन का शिकंजा
राज्य में शत-प्रतिशत लागू होंगे एनईपी-2020 के प्रावधान- डाॅ. धन सिंह रावत
राज्य में शत-प्रतिशत लागू होंगे एनईपी-2020 के प्रावधान- डाॅ. धन सिंह रावत
उप निरीक्षक से निरीक्षक बने कुन्दन राम, SSP ने पिपिंग सेरेमनी में किया सम्मानित
उप निरीक्षक से निरीक्षक बने कुन्दन राम, SSP ने पिपिंग सेरेमनी में किया सम्मानित
कोटद्वार में बढ़ते जलस्तर के बीच नदी में फंसे 12 वर्षीय बालक को SDRF ने रोप रेस्क्यू से बचाया
कोटद्वार में बढ़ते जलस्तर के बीच नदी में फंसे 12 वर्षीय बालक को SDRF ने रोप रेस्क्यू से बचाया

बुजुर्गों की सेहत और चुनौतियां, पारिवारिक और सामाजिक उपेक्षा बढ़ रहा संकट

बुजुर्गों की सेहत और चुनौतियां, पारिवारिक और सामाजिक उपेक्षा बढ़ रहा संकट

किरन सिंह

अगर बुजुर्गों की आबादी का एक बड़ा हिस्सा किन्हीं वजहों से अपना इलाज नहीं करा पाता, तो यह समाज और व्यवस्था की एक बड़ी नाकामी है। गौरतलब है कि एक गैरसरकारी संगठन के अध्ययन में यह तथ्य सामने आया है कि शहरी इलाकों के लगभग पचास फीसद बुजुर्ग आर्थिक मुश्किलों और कई अन्य तरह की चुनौतियों के चलते जरूरत के वक्त चिकित्सकों के पास नहीं जा पाते हैं। ग्रामीण इलाकों में यह समस्या ज्यादा व्यापक है। वहां बुजुर्ग आबादी के बासठ फीसद से ज्यादा के सामने आर्थिक और अन्य बाधाएं खड़ी हैं, जिनके चलते उन्हें बीमारी में मुश्किलों का सामना करना पड़ता है।

आमतौर पर साठ वर्ष की उम्र के बाद व्यक्ति को सेवानिवृत्ति की वजह से आर्थिक चुनौतियों का सामना करना पड़ता है, जबकि इसी उम्र में उन्हें सेहत संबंधी देखभाल की ज्यादा जरूरत पड़ती है। ऐसे में अगर स्वास्थ्य सुविधाएं सुलभ हों तो उनका जीवन कुछ आसान हो सकता है। मगर कई बार पारिवारिक उपेक्षा के शिकार बुजुर्गों को सरकार की ओर से भी सामाजिक सुरक्षा के रूप में कोई विशेष सुविधा नहीं मिल पाती है। वहीं देश के कई इलाकों में सार्वजनिक स्वास्थ्य सुविधाओं का अभाव और आर्थिक स्थिति से जुड़ी समस्याएं जगजाहिर रही हैं।

यह कोई छिपा तथ्य नहीं है कि आज वृद्धावस्था में पेंशन या अन्य सामाजिक सुरक्षा के अभाव में दैनिक खर्च और स्वास्थ्य देखभाल पर खर्च में भारी उछाल आया है। इसके अलावा, स्वास्थ्य बीमा के क्षेत्र में ज्यादा उम्र वालों के लिए अब तक जो शर्तें रही हैं, वे स्वास्थ्य सुविधाओं तक उनकी पहुंच को मुश्किल बनाती हैं। आए दिन ऐसी खबरें आती रहती हैं कि किसी वृद्ध व्यक्ति के बीमार पड़ने पर उचित इलाज न मिल पाने से उसकी जान चली गई।

यह ध्यान रखने की जरूरत है कि आमतौर पर हर बुजुर्ग अपने बाद की उस पीढ़ी को बेहतर जीवन देने के लिए अपनी जिंदगी झोंक देता है, जो अपने परिवार साथ-साथ समाज और देश के लिए एक उपयोगी संसाधन बनता है। सवाल है कि बुजुर्गों की अपनी संतानें और सत्ता-तंत्र उसके स्वास्थ्य और संतोषजनक जीवन के लिए उचित व्यवस्था करने के प्रति उदासीन क्यों रहता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back To Top